जानिए, कितने मुख वाला रुद्राक्ष है आपके लिए लाभकारी

Glory-and-Importance-of-Rudraksha

भारतीय संस्कृति में रुद्राक्ष का बहुत महत्व है। माना जाता है कि रुद्राक्ष इंसान को हर तरह की हानिकारक ऊर्जा से बचाता है। इसका इस्तेमाल सिर्फ तपस्वियों के लिए ही नहीं, बल्कि सांसारिक जीवन में रह रहे लोगों के लिए भी किया जाता है। रुद्राक्ष को भगवान शिव के अक्ष अर्थात आंख कहे गए हैं […]

गायत्री मंत्र के जाप में रखें इन बातों का ध्यान!

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गायत्री महामंत्र  वेदों का एक महत्त्वपूर्ण मंत्र है जिसकी महत्ता ॐ के लगभग बराबर मानी जाती है।  ऐसा माना जाता है कि इस मंत्र के उच्चारण और इसे समझने से ईश्वर की प्राप्ति होती है। यह मंत्र सर्वप्रथम ऋग्वेद में उद्धृत हुआ है। इसके ऋषि विश्वामित्र हैं और देवता सविता हैं। गायत्री महामंत्र ॐ भूर्भुव […]

इसलिए एकदंत कहलाते हैं भगवान श्रीगणेश

गणेशजी एकदंत

गणेश शब्द का अर्थ है- ज्ञान-बुद्धि तथा निर्वाण के स्वामी अर्थात ब्रह्मा, परमात्मा, परमेश्वर या परमतत्व। हिन्दू धर्म में गणेश जी सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। वे गणों के ईश अर्थात स्वामी, स्वस्तिकरूप तथा प्रणवस्वरूप हैं। प्रत्येक शुभ कार्य में सबसे पहले इनका पूजन करना अनिवार्य माना गया है। पुराणों में बताया गया है कि […]

कमलनाथ महादेव मंदिर – यहां भगवान से पहले भक्त की पूजा

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भगवान शिव के अनेक भक्त हैं। उनमें से रावण भी एक है। हमारे देश में एक मंदिर ऐसा भी है जहां शिवजी से पहले रावण की पूजा की जाती है। राजस्थान के उदयपुर से लगभग 80 किलोमीटर दूर, झाडौल तहसील की आवारगढ़ की पहाड़ियों पर है भगवान शिव का प्राचीन मंदिर। भगवान का यह धाम […]

जानिए गणेश जी का वाहन कैसे बना चूहा?

जानिए गणेश जी का वाहन

देवों में सर्वप्रथम पूज्य गणेश जी का वाहन चूहा है। चूहा जिसे संस्कृत में मूषक कहते हैं, जो कि शारीरिक आकार में छोटा होता है। गणेश जी बुद्धि के देवता है तो चूहा को तर्क-वितर्क का प्रतीक माना गया है। चूहे में इसके अलावा और भी कई गुण होते हैं, यही कारण है कि गणेशजी […]

भोलेनाथ का रहस्यमयी मंदिर, जहां मां गंगा खुद करती हैं शिवजी का जलाभिषेक!

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भारतीय पौराणिक इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण कथा गंगावतरण, जिसके द्वारा भारतवर्ष की धरती पवित्र हुई, में इक्ष्वाकु वंशीय दिलीप के पुत्र भगीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर शिव ने गंगा की धारा को देवलोक से भूलोक में उतारा। गंगावतरण की यह पौराणिक कथा तो त्रेता युग की है, परन्तु वर्तमान कलयुग में भी झारखण्ड प्रांत […]

क्यों जलाते हैं नवरात्रि में अखंड ज्योत?

नवरात्रि का पर्व वर्ष में दो बार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तथा अश्विन शुक्ल प्रतिपदा को आता है। जिसे ग्रीष्मकालीन व शारदीय नवरात्र के नाम से जाना जाता है। वर्षा के पश्चात् शीतऋतु दस्तक देने लगती हैं, जो धान, ज्वार, बाजरा जैसी कई खरीफ की फसलों के तैयार होने और खेतों में रबी की फसलें लहलहाने […]