इसलिए एकदंत कहलाते हैं भगवान श्रीगणेश

गणेशजी एकदंत

गणेश शब्द का अर्थ है- ज्ञान-बुद्धि तथा निर्वाण के स्वामी अर्थात ब्रह्मा, परमात्मा, परमेश्वर या परमतत्व। हिन्दू धर्म में गणेश जी सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। वे गणों के ईश अर्थात स्वामी, स्वस्तिकरूप तथा प्रणवस्वरूप हैं। प्रत्येक शुभ कार्य में सबसे पहले इनका पूजन करना अनिवार्य माना गया है। पुराणों में बताया गया है कि गणेशजी की भक्ति शनि समेत सारे ग्रह दोषों को दूर करने वाली होती है। गणेशजी की पूजा करने से व्यक्ति का सुख और सौभाग्य बढ़ता है और सभी विघ्न दूर हो जाते हैं। वे एकदंत और चतुर्भुज कलहते हैं।

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गणेशजी को एकदंत क्यों कहा जाता है और उसके पीछे कौन-कौन सी कहानियां प्रचलित है। गणेश जी का दांत कैसे टूटा, और क्यों गणेश जी अपने दांत को हाथ में पकड़े रहते हैं इसकी एक नहीं कई बड़ी रोचक कथाएं हैं जिनमें से 4 प्रमुख हैं।

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कथा 1 : परशुराम जी अपने परशे से तोडा गणेश जी का एक दांत

पुराणों में बताया गया है कि एक बार विष्मु अवतार भगवान परशुराम जी शिवजी से मिलने कैलाश पर्वत पर गए थे। उस दौरान शिव पुत्र गणेशजी ने उन्हें उनसे मिलने से रोक दिया और उन्हें मिलने की अनुमति नहीं दी। इस बात से परशुरामजी बेहद क्रोधित हो गए और उन्होंने गणेशजी को युद्ध के लिए चुनौती दे डाली। गणेशजी भी पीछे हटने वालों में से नहीं थे। उन्होंने परशुरामजी की यह चुनौती स्वीकार कर ली। दोनों में घोर युद्ध हुआ। इसी युद्ध में परशुरामजी के फरसे से उनका एक दंत टूट गया। तभी से वे एकदंत कहलाए।

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कथा 2 : कार्त‌िकेय ने ही तोडा उनका दांत

भविष्य पुराण में एक कथा बताई गई है, जिसमें कार्तिकेय ने अपने भाई गणेश ता दंत तोड़ दिया था। हम सभी जानते हैं कि गणेशजी बचपन से ही बेहद नटखट थे। एक बार उनकी शरारतें बढ़ती जा रही थी और उन्होंने अपने बड़े भाई कार्तिकेय को भी परेशान करना शुरू कर दिया था। इन सब हरकतों से परेशान होकर कार्तिकेय ने उन पर हमला कर दिया। इस हमले में भगवान गणेश को एक दांत गंवाना पड़ गया था। यही दांत कई मूर्तियों और फोटो में गणेशजी के हाथों में दिखाया जाता है।

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कथा 3 : वेदव्यास जी की महाभारत लिखने के लिए खुद ने तोडा अपना दांत

एक अन्य कथा यह भी है कि महर्षि वेदव्यास को महाभारत लिखने के लिए बुद्धिमान किसी लेखक की आवश्यकता थी। इस कार्य के लिए श्रीगणेश जी का चयन किया गया। गणेश इस कार्य के लिए मान तो गए, लेकिन गणेश जी से शर्त रखी गई कि पूरा महाभारत लेखन में एक पल ले लिए भी बिना रुके पूरा करना होगा। दोनों महाभारत लिखने बैठ गए। वेदव्यास जी महाकाव्य को अपने मुख से बोलने लगे और गणेश जी जल्दी-जल्दी लिखने लगे। कुछ देर लिखने के बाद अचानक गणेश जी का कलम टूट गया, तब भगवान गणेश ने अपने एक दांत को तोड़ दिया और स्याही में डुबोकर महाभारत की कथा लिखने लगे।इसी प्रकार वेद व्यासजी के वचनों पर महाभारत लिखी गई।

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कथा 4 : एक असुर का वध करने के लिए गणेशजी ने लिया अपने दांत का सहारा

एक कथा यह भी है कि जब गजमुखासर नामक एक असुर से गजानन का युद्ध हुआ। उस समय गजमुखासुर को यह वरदान मिला हुआ था कि वह किसी भी अस्त्र से नहीं मर सकता है। गणेशजी ने इसे मारने के लिए अपने एक दांत को तोड़ा और गजमुखासुर पर वार किया। गजमुखासुर इससे खबरा गया और मूषक बनकर भागने लगा था। इसके बाद गणेश भगवान ने अपनी शक्ति से उसे बांध लिया और उसे अपना वाहन बना लिया।

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शक्तिशाली है एकदंत का यह मंत्र

गं गणपतये नमः

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