जानिए, कितने मुख वाला रुद्राक्ष है आपके लिए लाभकारी

Glory-and-Importance-of-Rudraksha

भारतीय संस्कृति में रुद्राक्ष का बहुत महत्व है। माना जाता है कि रुद्राक्ष इंसान को हर तरह की हानिकारक ऊर्जा से बचाता है। इसका इस्तेमाल सिर्फ तपस्वियों के लिए ही नहीं, बल्कि सांसारिक जीवन में रह रहे लोगों के लिए भी किया जाता है। रुद्राक्ष को भगवान शिव के अक्ष अर्थात आंख कहे गए हैं । पौराणिक मान्यताएं हैं कि कि शिव के नेत्रों से रुद्राक्ष का उद्भव हुआ और यह हमारी हर तरह की समस्या को हरने की क्षमता रखता है। कहते हैं रुद्राक्ष जितना छोटा हो, यह उतना ही ज्यादा प्रभावशाली होता है। सफलता, धन-संपत्ति, मान-सम्मान दिलाने में सहायक होता है। रुद्राक्ष एक खास तरह के पेड़ का बीज है। आज देश में बहुत कम रुद्राक्ष के पेड़ बचे हैं। आज ज्यादातर रुद्राक्ष नेपाल, बर्मा, थाईलैंड या इंडोनेशिया से लाए जाते हैं। रुद्राक्ष नकारात्मक ऊर्जा के बचने के एक असरदार कवच की तरह काम करता है।

रुद्राक्ष को धारण के लिए कुछ नियम भी हैं:-

जो पूरे नियमों द्वारा रुद्राक्ष को धारण करता है, उनकी सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
घुन लगा, कीडों द्वारा खाया गया, टूटा-फूटा (खण्डित) या छीलकर बनाया गया रुद्राक्ष कभी धारण नहीं करना चाहिए।
रुद्राक्ष पर भगवान शिव के मन्त्रों का जप करके धारण करना चाहिए अथवा शिवलिंग से स्पर्श कराकर धारण करना चाहिए।
रुद्राक्ष की जिस माला से आप जाप करते हैं उसे धारण नहीं किया जाना चाहिए।
रुद्राक्ष को किसी शुभ मुहूर्त में ही धारण करना चाहिए।
रुद्राक्ष को रखने का स्थल शुद्ध एवं पवित्र होना चाहिए ।
इसे अंगूठी में नहीं जड़ाना चाहिए।

कहा जाता है कि जिन घरों में रुद्राक्ष की पूजा होती है, वहां मां लक्ष्मी का वास होता है। यह भगवान शंकर की प्रिय चीज मानी जाती है। रुद्राक्ष का मानव शरीर से स्पर्श महान गुणकारी बतलाया गया है। रुद्राक्ष के एक ही वृक्ष से कई प्रकार के रुद्राक्ष मिलते हैं । एक मुखी रुद्राक्ष को साक्षात् शिव का स्वरूप कहा गया है । सभी मुख वाले रुद्राक्षों का अलग-अलग फल एवं अलग-अलग धारण करने की विधियां बतलाई गयी हैं। रुद्राक्ष प्राय: तीन रंगो में पाया जाता है। लाल, मिश्रित लाल व काला । इसमें धारियां बनी रहती है । इन धारियों को रुद्राक्ष का मुख कहा गया है । एक मुखी से लेकर इक्कीस मुखी तक रुद्राक्ष होते हैं । परंतु वर्तमान में चौदहमुखी तक रुद्राक्ष उपलब्ध हैं। आइए जानें, कौन से फायदे के लिए कितने मुख वाले रुद्राक्ष को धारण करना चाहिए।

  • एकमुखी रुद्राक्ष दुर्लभ माना जाता है, इसे साक्षात् श‍िव बताया गया है। माना जाता है कि इसे धारण करने से व्यक्‍त‍ि को यश की प्राप्त‍ि होती है।
  • दो मुखी शिव पार्वती रूप है, इसे धारण करने से कई तरह के पाप दूर होते हैं। वह सम्‍पूर्ण कामनाओं और फलों को देने वाला है।
  • तीन मुखवाला रुद्राक्ष त्रिदेवरूप है जो विद्या और सिद्धियाँ देता है। जिनको विद्या प्राप्ति की अभिलाषा है, उन्हें मंत्र (ऊँ क्लीं नम:) के साथ तीनमुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।
  • चार मुखी ब्रह्मरूप है, जो चतुर्विध फल देता है। ये रुद्राक्ष धारण करने वाले भक्त को धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसका मंत्र है- ऊँ ह्रीं नम:।। इस मंत्र के साथ चारमुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।
  • पंचमुखी रुद्राक्ष पंचमुख शिवरूप है, सबको मुक्‍ति देनेवाला तथा सम्‍पूर्ण मनोवांछित फल प्रदान करने वाला है। पंचमुख रुद्राक्ष समस्‍त पापों को दूर कर देता है। इसका मंत्र है- ऊँ ह्रीं नम:।। इस मंत्र के साथ पंचमुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।
  • छह मुखवाला रुद्राक्ष भगवान कार्तिकेय का स्‍वरूप है। इसको बायीं भुजा में धारण करने से ऋद्धि – सिद्धि प्राप्त होती है । व्यापार में भी सफलता प्राप्त होती है । इसका मंत्र है- ऊँ ह्रीं हुं नम:। इस मंत्र के साथ यह रुद्राक्ष धारण करें।
  • सात मुखी रुद्राक्ष अनन्त नाम से विख्यात है, यह दरिद्रता दूर कर अपार धन दिलाने में सहायक है। इसका मंत्र है- ऊँ हुं नम:। इस मंत्र के साथ यह रुद्राक्ष धारण करें।
  • आठ मुखवाला रुद्राक्ष अष्‍टमूर्ति भैरवरूप है, उसको धारण करने से मनुष्‍य पूर्णायु होता है। यह धारण करने से शत्रु परास्त होते है और मनुष्य अभय हो जाता है। इसका मंत्र है- ऊँ हुं नम:। इस मंत्र के साथ यह रुद्राक्ष धारण करें।
  • नौ मुखी भैरव वह कपिल स्वरूप है। यह रुद्राक्ष महाशक्ति के नौ रूपों का प्रतीक है। इन लोगों को समाज में मान-सम्मान प्राप्त होता है। इसे बाईं भुजा में पहनना चाहिए. इसे धारण करने वाले को भोग और मोक्ष की प्राप्त होती है। इसका मंत्र है- ऊँ ह्रीं हुं नम:। इस मंत्र के साथ यह रुद्राक्ष धारण करें।
  • दस मुखवाला रुद्राक्ष साक्षात् भगवान विष्‍णु का रूप है। उसको धरण करने से मनुष्‍य की सम्‍पूर्ण कामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। इसका मंत्र है- ऊँ ह्रीं नम:। इस मंत्र के साथ यह रुद्राक्ष धारण करें।
  • ग्यारह मुखी एकादश रुद्ररूप है, ग्यारह मुखी रुद्राक्ष धारण करने से एकादशी व्रत करने के समान फल प्राप्त होता है । यदि बाँझ स्त्री श्रद्धा एवं विश्वासपूर्वक इसे धारण करें तो वह शीघ्र ही संतानवती हो जाती है। शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। इसका मंत्र है- ऊँ ह्रीं हुं नम:। इस मंत्र के साथ ये रुद्राक्ष धारण करें।
  • बारह मुखी द्वादश आदित्य रूप है,यह आपकी कीर्ति यश को जगत में सूर्य की तरह बढाता है। उन्हें बारह आदित्यों की विशेष कृपा प्राप्त होती है। बारहमुखी रुद्राक्ष विशेष रूप से बालों में धारण करना चाहिए। इसका मंत्र है- ऊँ क्रौं क्षौं रौं नम:। इस मंत्र के साथ यह रुद्राक्ष धारण करें।
  • तेरह मुखी रुद्राक्ष विश्वरूप है, जो सौभाग्य मंगल देता हैं। इस रुद्राक्ष को धारण करने से व्यक्ति भाग्यशाली बन सकता है। तेरहमुखी रुद्राक्ष से धन लाभ होता है। इसका मंत्र है- ऊँ ह्रीं नम:। इस मंत्र के साथ यह रुद्राक्ष धारण करें।
  • चौदह मुखवाला जो रुद्राक्ष है, वह परम शिवरूप है। उसे भक्‍ति पूर्वक मस्‍तक पर धरण करें। इससे समस्‍त पापों का नाश हो जाता है। इस रुद्राक्ष को मस्तक पर धारण करना चाहिए। इसका मंत्र है- ऊँ नम:। इस मंत्र के साथ यह रुद्राक्ष धारण करें।

अगर आप अपने जीवन को शुद्ध करना चाहते हैं तो रुद्राक्ष उसमें मददगार हो सकता है। जब कोई इंसान अध्यात्म के मार्ग पर चलता है, तो अपने लक्ष्य को पाने के लिए वह हर संभव उपाय अपनाने को आतुर रहता है। ऐसे में रुद्राक्ष निश्चित तौर पर एक बेहद मददगार जरिया साबित हो सकता है।

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