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गायत्री मंत्र के जाप में रखें इन बातों का ध्यान!

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गायत्री महामंत्र  वेदों का एक महत्त्वपूर्ण मंत्र है जिसकी महत्ता ॐ के लगभग बराबर मानी जाती है।  ऐसा माना जाता है कि इस मंत्र के उच्चारण और इसे समझने से ईश्वर की प्राप्ति होती है। यह मंत्र सर्वप्रथम ऋग्वेद में उद्धृत हुआ है। इसके ऋषि विश्वामित्र हैं और देवता सविता हैं।

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गायत्री महामंत्र

ॐ भूर्भुव स्वः।
तत् सवितुर्वरेण्यं।
भर्गो देवस्य धीमहि।
धियो यो नः प्रचोदयात् ॥

इस मंत्र का भावार्थ :

ॐ = प्रणव
भूर = मनुष्य को प्राण प्रदाण करने वाला
भुवः = दुख़ों का नाश करने वाला
स्वः = सुख प्रदाण करने वाला
तत = सूर्य की भांति उज्जवल
वरेण्यं = सबसे उत्तम
भर्गो = कर्मों का उद्धार करने वाला
देवस्य = प्रभु
धीमहि = आत्म चिंतन के योग्य
धियो = बुद्धि,
यो = जो,
नः = हमारी,
प्रचोदयात् = हमें शक्ति देने वाला (प्रार्थना)


 

उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अन्तःकरण में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करे।

मंत्र जाप: भगवान सूर्य की उपासना के लिए सबसे आसान और फलदायी मंत्र ‘गायत्री मंत्र’ कहा जाता है। इस मंत्र का जाप करने से स्वास्थ्य, यश, प्रसिद्धि, धन-दौलत तो मिलती ही है साथ ही इसका जाप करने से मन और वाणी भी पवित्र हो जाते हैं। इस मंत्र को पढ़ने से पहले कुछ बातों के बारे में पता होना जरूरी है।

गायत्री मंत्र का जाप करते हैं तो इन बातों का रखें ध्यान:

गायत्री उपासना कभी भी, किसी भी स्थिति में की जा सकती है। हर स्थिति में यह लाभदायी है, परन्तु विधिपूर्वक भावना से जुड़े न्यूनतम कर्मकाण्डों के साथ की गयी उपासना अति फलदायी मानी गयी है।

  • इस मंत्र का मानसिक जप किसी भी समय किया जा सकता है।
  • गायत्री मंत्र को पढ़ते समय आरामदायक स्थिति में बैठना चाहिए, जैसे पदमासना, सुखासन अर्धपदमासनास सिद्धआसना। किसी आसान पर बैठकर ही गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए।
  • कुश या चटाई का आसन बिछाएं। पशु की खाल का आसन निषेध है।
  • इस मंत्र का जाप शौच-स्नान से निवृत्त होकर साफ-सुथरे कपड़े पहनकर करना चाहिए।
  • गायत्री मंत्र के लिए स्नान के साथ मन और आचरण पवित्र रखें।
  • गायत्री मंत्र का जाप करते हैं तो इसका जाप करने के समय का भी ध्यान होना बहुत जरूरी है। गायत्री मंत्र को सुबह, दोपहर और शाम के समय पढ़ सकते हैं।
  • गायत्री मंत्र जप करने वाले का खान-पान शुद्ध और पवित्र होना चाहिए। किंतु जिन लोगों का सात्विक खान-पान नहीं है, वह भी गायत्री मंत्र जप कर सकते हैं। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस मंत्र के असर से ऐसा व्यक्ति भी शुद्ध और सद्गुणी बन जाता है।
  • अगर माला से गायत्री मंत्र का जाप करना चाहते हैं तो 108 मनकों की माला को रखें। इसके लिए तुलसी की माला या चंदन की माला रखें।
  • गायत्री मंत्र को जल्दी-जल्दी नहीं पढ़ना चाहिए। दरअसल इसके महत्व को समझकर ही गायत्री मंत्र का उच्चारण करना चाहिए।
  • इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।
  • वेदों के सर्वश्रेष्ठ मंत्र यानी ‘गायत्री मंत्र’ के जाप ही नहीं बल्कि सुनने मात्र से ही आपको ढेरों स्वास्थ्य लाभ होते हैं।

गायत्री मंत्र जप के फायदे :

  • उत्साह एवं सकारात्मकता बढ़ती है।
  • त्वचा में चमक आती है।
  • बुराइयों से मन दूर होता है।
  • धर्म और सेवा कार्यों में मन लगता है।
  • पूर्वाभास होने लगता है।
  • आशीर्वाद देने की शक्ति बढ़ती है।
  • स्वप्न सिद्धि प्राप्त होती है।
  • क्रोध शांत होता है।

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